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Latest News:

और अंतिम रस है- वात्सल्य-रस: 12 Aug 2013 | 10:02 pm

बाल कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान के विशेष संदर्भ में - कभी कभी और प्रायः सोचता हूं कि मीठा अंत में क्यों परोसा जाता है? समारोह का अध्यक्ष आख़री में क्यों बोलता है? प्रथम विजेता की घोषणा अंत में ही क्....

नागपंचमी 6 Aug 2013 | 07:52 am

नागपंचमी त्यौहार हमारी ‘सांस्कृतिक विरासतों में एक’ प्रतिनिधि-त्यौहार है। विदेशों में भारत ‘संपेरों के देश’ के रूप में जाना जाता है। ऐनाकोंडा और कोब्रा जैसे ख़तरनाक सांपों को विदेशी महत्व का समझा जाता...

औरत की जात, ( भाग 1) 31 Jan 2013 | 06:32 pm

           दुष्यंतकुमार ने अपनी एक स्वाभिमानी ग़ज़ल में प्रकृति के ‘कार्य कारण संबंधों’ पर हमारे व्यावहारिक कयासों का चित्रण करते हुए लिखा है- कल रात जो फ़ाके में मरा, उसके बारे में, सभी कहतें हैं कि ...

विवेकानंद के जीवन दर्शन का साहित्य पर प्रभाव 15 Nov 2012 | 01:17 pm

विवेकानंद के जीवन दर्शन का साहित्य पर प्रभाव विवेकानंद भारतीय राष्ट्रीय संदर्भों में युवकों के प्रेरणा सा्रेत के रूप में प्रासंगिक रहे हैं। विवेकानंद का नाम भारत के गौरवपूर्ण धार्मिक-अध्यात्म को विश्...

मातृभाषा हिन्दी 29 Sep 2012 | 08:51 pm

परिणीता होकर भी क्या परित्त्यक्ता बनी रहे। कोई बताए अपनी माता क्यों अनमनी रहे? इस घर में सौतेली मांओं का अधिकार रहा। बोली,भाषा,रहन,सहन, उनके अनुसार रहा। पांवों पर पत्थर की ठोकर, सिर पर चोट लगी, जी पर...

Untitled 3 Jul 2012 | 10:16 pm

3.पूर्वकथा 2. मृत्युंजय का अर्थ शाब्दिक दृष्टि से मृ्त्यु पर जय प्राप्त करना हो सकता है। केवल महादेव या शिव ने इस असंभव को संभव कर दिखाया था ऐसी आस्थामूलक कहानी हम सुनते आ रहे हैं। वह श्मशान में रहते ...

श्मशान गीता-2 22 Jun 2012 | 10:49 pm

पूर्वकथा- तरह तरह की मनःस्थितियों के चलते चलते अंततः शववाहन में शव को डालकर शवयात्रा शुरू हुई। होता क्या है कि जीते जी हमें एक से अधिक शवयात्रा में शामिल होना पड़ता है। शवयात्रा में सभी ...

श्मशान गीता-1 13 Jun 2012 | 08:26 pm

लीगल सूचना:  मृत्यु कोई भयानक हौलनाक चीज नहीं है। कम से कम दूसरों की तो बिल्कुल नहीं। मृत्यु भी एक परिवर्तन है, जिससे हम नहीं डरते। परिवर्तन तो जिन्दगी में एक नया चार्म है। गीता भी यही कहती है। एक जगह...

दर्द के गुण-सूत्र 20 May 2012 | 05:36 pm

आपके इधर तो खैर आता ही होगा, हमारे भी आता है एक फेरीवाला.. प्लास्टिक के घरेलू आइटम लेकर. वादा करता हे कि अगली बार वह भी लेकर आउंगा जो इस बार नहीं लाया..तो फिर जरूर आता है.. लीजिए मैंने भी कहा था कि अग...

विवाह की वर्षगांठ: गांठ-विज्ञान के विशेष संदर्भ में। 10 May 2012 | 05:44 pm

आज मेरे विवाह की वर्ष-गांठ है। जयंती और दिवस जो होते हैं, वो मरणोपरांत मनाए जाते हैं। हमारे देश में प्रसिद्ध दिवस और जयंतियां हैं- बाल दिवस, शिक्षक दिवस, सदभावना दिवस, रजत जयंती, हीरक जयंती, प्रेमचंद ...

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