Blogspot - sadbhawanadarpan.blogspot.com - गिरीश पंकज

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रक्षा बंधन की हार्दिक शुभ कामनाएँ 20 Aug 2013 | 04:52 pm

बहनों की रक्षा करें, अपनी हो या गैर, खतरे में बहने यहाँ, शत्रु दिखे हैं ढेर . . रक्षाबंधन और क्या, है मन का विश्वास। कभी न टूटे बस यही , रखे बहन ये आस. निर्मल राखी-पर्व है, यहाँ लेन, ना देन, त्याग, ...

गीत / जिसके लिए लड़े ना कोई, उसके लिए लड़ें 16 Jul 2013 | 06:16 pm

जिसके लिए लड़े ना कोई, उसके लिए लड़ें ऐसा प्यारा जीवन अपना, आओ चलो गढ़ें. जो प्यासा है उसको पानी देना अपना धर्म . गिरे हुए को अगर उठाया वह पुनीत है कर्म . भटके जन को राह दिखाई यह भी है इक पुन्य , सच के ...

जैसे किया सवाल देखिये / सत्ता में भूचाल देखिये 3 Jun 2013 | 10:07 am

कविता लम्बी तो है, मगर शायद पसंद आ जाये ------------------------------ ------------------------- जैसे किया सवाल देखिये / सत्ता में  भूचाल देखिये क्या सोचा था क्या पाया है / लोकतंत्र का हाल देखिये सच ...

ये कैसा है माओवाद ? 30 May 2013 | 10:12 am

ये कैसा है माओवाद ? लाशे बिछा रहे लोगों की, धरती के खूनी ज़ल्लाद। ------ है विचार की आड़ मगर ये तो व्यभिचारी दिखते हैं 'दाउद' के गुर्गे हों जैसे, लुच्चॆ, शातिर लगते हैं। काश, आज और अभी हो सके हर हिंसक फ़...

देश हमें हो प्राण से प्यारा, वन्दे मातरम........................ 9 May 2013 | 07:07 pm

सबसे पहला धर्म हमारा, वन्दे मातरम देश हमारा सबसे न्यारा, वन्दे मातरम देश है सबसे पहले, उसके बाद धर्म आये सोचो इस पर आज दुबारा,  वन्दे मातरम हिन्दू मुस्लिम, सिख, ईसाई बातें हैं बेकार देश हमें हो प्राण...

इक दिन ये विस्फोट करेगी / टूटे अगर करोडो चुप्पी 15 Apr 2013 | 05:54 pm

बहुत हो गया तोड़ो चुप्पी जिंदा हो तो छोडो चुप्पी अगर नहीं हो कायर तो फिर बेमतलब क्यों ओढ़ो चुप्पी वक़्त बगावत का आया है अरे, अभी मत जोड़ो चुप्पी देखो निकलेगा अंगारा हिम्मत करो निचोड़ो चुप्पी कूच कर...

एक प्रार्थना / ज़िंदगी सुन्दर रहे 4 Apr 2013 | 07:48 pm

एक प्रार्थना --------------- ज़िंदगी सुन्दर रहे नित्य ही बेहतर रहे प्यार ही बस प्यार हो वह कोई भी दर रहे देखती है आत्मा बस यही इक डर रहे सामने आकाश है हौसलों का 'पर' रहे बस प्रभू के सामने अपना झुका...

फिर मुझे धोखा मिला, मैं क्या कहूँ... 28 Jan 2013 | 08:24 pm

पेश है उन लोगों का दर्द जो ये सब भोग चुके हैं ------------------------------ -------------------------- फिर मुझे धोखा मिला, मैं क्या कहूँ है यही इक सिलसिला, मैं क्या कहूँ देख ली तेरी वफ़ा मैंने इधर -...

गीत/ सत्ता का गुणगान नहीं जो लिख पाया.... 6 Dec 2012 | 10:51 am

।। गीत।। --------------- सत्ता का गुणगान नहीं जो लिख पाया। क्या करता कि कभी नहीं वो बिक पाया। । -------------- बाजारों में लोग बड़े आतुर दिखते, जिसको देखो चौराहे पर खडा हुआ। मिल जाएँ कुछ टुकडे तो वे लप...

हर आँगन में दीप जले ...... 11 Nov 2012 | 07:03 pm

हर आँगन में दीप जले हर दिन हो सबकी दीवाली, दीप ध्यान यह रखना तुम सिर्फ अमीरों के अंगने में, जा कर के ना जलना तुम। खुशी एक बेटी है प्यारी हर घर फूले और फले।। सबके हिस्से में हो उत्सव, नहीं रहे कोई न...

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