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Latest News:

डायरी में तेईस अक्तूबर 1 Apr 2013 | 03:48 am

पिछले पोस्ट के आलेख में मैंने अपनी एक कविता 'लड़ाई की कविता' का ज़िक्र किया है जो फुकुयामा को मे रा जवा ब है। मेरा पहला ऐसा प्रयास नीचे पेस् ट की गई कविता में है, जो तकरीबन 18 साल पहले आई आ ई टी कानपु...

छिटपुट खयाल और दो कविताएँ 18 Feb 2013 | 03:19 am

बाईस साल पहले जब बर्लिन की दीवार गिरी और सोवियत संघ के प्रभाव क्षेत्र में विघटन की प्रक्रिया की शुरूआत हुई तो पूँजीवाद के पक्षधरों को लगा कि अंतिम फैसला हो चुका। साम्य की लड़ाई खत्म हो गई और पूँजीवाद क...

अगड़म बगड़म 17 Jan 2013 | 08:50 am

कुछ साल पहले मैंने सुकुमार राय की अनोखी कृति 'आबोल ताबोल' से अनूदित कविताएँ पोस्ट की थीं। 1988 में अशोक अग्रवाल ने संभावना प्रकाशन से मेरी अनूदित ऐसी 20 कविताओं की पुस्तिका प्रकाशित की थी। ये नॉनसेंस ...

इन जंगों में कौन मरा? 15 Jan 2013 | 09:34 am

इस आलेख का एक संक्षिप्त प्रारूप आज के जनसत्ता में आया है। कुछ बातें पुरानी हैं जो 11 साल पहले जनसत्ता मेंही छपे एक आलेख में थीं, कुछ इसी ब्लॉग के पुराने चिट्ठों में थींः लकीरें खींच कर माँ को बच्चों स...

आज की लड़ाई - एक पुराना चिट्ठा 13 Jan 2013 | 07:20 am

क्या लिखें। शिकारी मानव ने भी वह सब सोच लिया होगा जो हम निरंतर सोच रहे हैं। यह तो हताशा की बात रही। बहरहाल, पुराना एक चिट्ठा पढ़िए। ज़रूरी है। http://laltu.blogspot.in/2006/02/blog-post_10.html

छब्बीस साल पहले लिखी एक रचना 30 Dec 2012 | 04:52 am

किसी दिन तू आएगी तू जो मेरे जन्म से मौत तक मुझसे जुड़ी है तेरे कठिन कोमल हाथों में खिलता तेरे आँसुओं को पहचानता तेरी चाह में भटकता तेरी मांसलता में खुद को छिपाता तेरे दिए बच्चों से खेलता तुझे रौंदता र...

प्रकृति-प्रेरित ऊर्जा के वैकल्पित स्रोत 27 Nov 2012 | 01:09 pm

हमारे समय में ऊर्जा का संकट एक बड़ा संकट है। औद्योगिक क्रांति के पहले जंगल से काट कर लाई गई लकड़ी ही ऊर्जा का मुख्य स्रोत थी। औद्योगिक क्रांति ने बड़े पैमाने पर कोयला और खनिज तेल की खपत बढ़ाई। कोयला और खन...

सुनील गांगुली की तीन कविताएँ 29 Oct 2012 | 11:06 am

(बांग्ला से अनूदित) इनमें से दो कल जनसत्ता रविवारी में प्रकाशित हुई हैं। किसी ने अपनी बात न रखी किसी ने अपनी बात न रखी , तैंतीस बरस गुज़र गए , किसी ने अपनी बात न रखी बचपन में एक जोगन अपना आगमनी गीत अच...

धार्मिक आस्था के जैविक स्रोतः संज्ञानात्मक खोज 4 Sep 2012 | 06:36 am

 ('समकालीन जनमत' के अगस्त 2012 अंक में प्रकाशित) ( इस आलेख का अधिकांश ' नेचर ' पत्रिका के 23 अक्तूबर 2008 के अंक में प्रकाशित पास्काल बोयर के आलेख पर आधारित है ) पिछले सौ वर्षों से लगातार कहा जाता रहा...

क्वांटम कंप्यूटिंग 25 Aug 2012 | 04:26 am

क्वांटम कंप्यूटिंग – चमत्कार के इंतज़ार में ('समकालीन जनमत' के जुलाई 2012 अंक में प्रकाशित) पिछली बार हमने इनफॉर्मेशन टेक्नोलोजी यानी सूचना प्रौद्योगिकी के विज्ञान पर बात की थी। हमने देखा कि ट्रांज़िस...

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